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राजनाथ सिंघ जी से बिझनेस लीडरशीप का पाठ

नरेन्द्र मोदी ने अपने व्यक्तिगत charishma दिखाकर बीजेपी को कल ऐतिहासिक बहुमत दिलाया है |
मोदी जी को नापसंद करनेवाले ऐसा कह सकते हैं कि यह तो पूरी बीजेपी के प्रयत्नों का नतीजा है, या यह anti-congress  wave है जिसका फायदा बीजेपी को मिला है…

जो कुछ भी हो, लेकिन एक बात तय है कि अगर बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्रीपद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया होता, तो बीजेपी को इतनी भारी सफलता किसी हाल में हांसल नहीं होती | इस भारी मात्रा में बीजेपी की सफलता का पूरा श्रेय मात्र दो व्यक्तियों को जाता है | एक तो नरेन्द्र मोदी खुद और दूसरे बीजेपी के अघ्यक्ष राजनाथ सिंघ |

इस पूरी यशगाथा में राजनाथ सिंघ ने एक बुझु्र्ग, परिपक्व और दूरदर्शी नेता की भूमिका बखूब निभाई है |

जिस तरह उन्होंने नरेन्द्र मोदी की काबिलियत को पहचानकर, उन पर पूरा भरोसा रखकर, बहुत सारे दिग्गजों के खिलाफ जाकर भी नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदारी सौंपकर भारत को एक नरेन्द्र मोदी नाम की नइ आशा दिलाइ है, उस पूरे उदाहरण से हम अपने बिझनेस के लिए एक अच्छा पाठ सिख सकते है |

किसी भी विकासशील बिझनेस में दो प्रकार के employees होते है | एक ऐसे जो बहुत पुराने होते हैं, जो बिझनेसमेन के साथ शुरुआत से जुडे होते हैं | उनकी योग्यता वफादारी तथा बिझनेस जैसे है वैसे चलाये रखने की क्षमता तक सीमीत होती है | यह लोग बिझनेस को एक लेवल से आगे ले जाने के लिए असमर्थ होते हैं, फिर भी उन्हें ऐसा लगता है कि वो ही बिझनेस के सूत्रघार हैं और वह खुद नहीं होंगे तो बिझनेस बिखर जाएगा | वास्तव में यह लोग ही बिझनेस की विकासयात्रा में एक बाधा होते हैं | वह खुद तो कुछ ज्यादा कर नहीं सकते और किसी नये व्यक्ति को आ कर कुछ परिवर्तन लाने की अनुमती भी नहीं दे सकते |

दूसरे कुछ ऐसे काबिल नये employees होते हैं जिन में बिझनेस को आगे ले जाने की भरपूर काबिलियत रहती है | उन में बिझनेस की नइ चुनौतियों का सामना करके उसे विकास की नइ ऊंचाईयों तक पहुंचाने की क्षमता होती है |

बीजेपी में भी ऐसे पुराने लोग हैं जिन की क्षमता पार्टी को एक लेवल से ज्यादा ले जाने की बिलकुल नहीं है | अगर ऐसे ऐतिहासिक दिग्गजों को बागडोर सौंपते तो बीजेपी को इतनी सफलता कभी नहीं मिल पाती |

राजनाथ सिंघ को सही व्यक्ति की, उस की काबिलियत की पहचान है, और ऐसी व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपकर, पुराने दिग्गजों को समझा-पटाकर, उन्हें अपने स्थान पर रखकर नये सेनापति को पूरी स्वतंत्रता देकर, उस के पीछे चट्टान की तरह खडा रहकर, उस का हौंसला बढ़ाकर उन्होंने भारत के इतिहास को एक नया मोड दिया है |

बिझनेसमेन को भी अपनी कंपनी में स्थापित स्पीड-ब्रेकर्स को अपनी जगह पर रखकर, नये काबिल ड्राइवर को चुनकर उसे कंपनी की यात्रा आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता देनी चाहिए | स्पीड-ब्रेकर नडेंगे, रुठेंगे, नखरे करेंगे | लेकिन चिंता मत करो, क्यों कि यह स्पीड-ब्रेकर कहीं जा नहीं सकते | आज के समय में कोइ दूसरी कंपनी इस पुराने स्पीड-ब्रेकर को नहीं रखेगी | सही ड्राइवर ही आप को आगे जाने में मदद कर सकता है | उसे पेट्रोल दो, उस पर ब्रेक मत मारो |

सही ड्राइवर अपनी काबिलियत से किसी भी पार्टी, देश या कंपनी को नइ राह, नइ आश दिखा सकता है | राजनाथ सिंघ के “नरेन्द्रभाइ” ने यह साबित कर दिया है | हमें अपने बिझनेस के लिए उन से लीडरशीप का यही पाठ सिखने जैसा है |

Are you focusing on the bigger picture of your business?

Rakesh had inherited a small 200 sq feet provision shop from his father. Then he bought two adjoining shops and grew it to 1000 sq ft size. His store was very famous in the neighborhood and people used to flock it to buy things from there. He gave a lot of personal attention to the store decor, cleanliness, inventory control etc. He checked these things himself. He spent his whole day at the store. He was very happy with his own progress.

His cousin, Nimesh also had inherited a similar shop, but today, Nimesh owned a chain of around 50 stores across the country and was aiming at 300 stores in next 5 years. Nimesh’s stores were also very famous for their quality, variety, cleanliness and service. Rakesh wondered at the 50 times higher growth of his cousin. He was curious to know what he should do to grow that big. Once, he asked Nimesh about this.

Nimesh told him his simple secret. “You and I both have 24 hours in a day, just like anybody else. What activities do we focus on during these 24 hours makes all the difference. We may focus all our time on doing the daily routine things or we can also focus on building our teams to take care of the routine things. I spend time on developing people and processes. First, I standardized my routine activities. Then, I multiplied my hands by finding good people and training them to help me doing routine things. I went on handing over responsibilities to them, which they were capable and willing to do. Today, in 24 hours, I can manage 50 shops, without sitting at any one of them.”

What Nimesh looked at was the bigger picture. We may get busy in developing our small business so much that we forget to prepare to scale it up. For scaling up, we need people and good processes. If we spend all our time in micro managing the things, the business will continue growing at linear rate, but it cannot multiply. For multiplication, we need to focus on bigger picture. For that, we need to get some free time. We need to develop and train our people. We need to develop our own self. We need to learn new things about our business. We need to meet new people.

All this is not possible if we are too busy micro managing. By doing so, we may be able to plug some petty expense, but we may be missing on some huge opportunity. The opportunities exist outside the four walls of our business and for identifying them, we need to keep in touch with that outer world.

Remember Nimesh’s words. We all have 24 hours. We may choose to spend it counting small change in our cash counter or focus on thinking ideas for multiplying our business and stores. The cash counter can be managed by some technology, but thinking cannot be outsourced to technology. The deadly disease of micro managing must be cured before it eats our growth potential. The Titanic sank because the captain focused too much on internal things and could not see the iceberg approaching in the foggy sea of uncertainties. The captain must focus on the bigger picture. Internal tasks can be delegated. Strategy is the captain’s job. That is the bigger picture.