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3 Marketing lessons from Samsung’s vulnerability

Recently, news are coming in that Samsung has lost its market leader position in Smartphone markets in India and China, two of its biggest markets. What makes Samsung’s position in mobile handset market so vulnerable?

In India, MicroMax and in China, Xiaomi are said to have displaced the market leader. MicroMax and Xiaomi are claimed to be beating Samsung at its own game in which it decimated Nokia few years back.

In the utterly crowded and commoditized mobile handset market, such drastic changes are not surprising, unless you are an Apple. Samsung may dispute the claim or defend its territory for a while, but not for long. Sooner than later it will have to give in to some competition, which may emerge and ascend rapidly because it has built its brand on the foundation of vulnerability.

What are the marketing lessons one can learn from Samsung’s shaky brand position? Here are three :

1) No single target customer segment
You can own  Samsung phone for as low as Rs 1200 or as high as about Rs.50,000. That is a full spectrum of mobile phone users. So, who is a Samsung target customer? Almost everybody.

Because of this large base, Samsung can be attacked by any Tom, Dick, Harry and their cousins. And it will have to spend time, money and energy in defending each of these territories.

Marketing lesson-1 :
Have a clear target customer segment and protect it firmly. Sharper the target, the safer. Don’t spread yourself too thin so that you can be attacked by anyone.

2) No clear positioning in customer’s mind
If you own an iPhone, that says something about you. You understand or appreciate quality, innovation and uniqueness. Also, you can afford a high-end phone.
If you own a Samsung? It does not say anything about your taste. You could as well own any other similar ‘looking’ phone.

Marketing lesson-2 :
Have a distinct positioning for your brand. Stand for something. Own a distinct position in customer’s mind. Don’t focus on marketshare alone. Focus on mind share instead. And drive that home in the customer’s mind.

3) No uniqueness
Apple has its unique hardware and its unique software. This makes switching difficult for an iPhone user because he gets used to some unique features, services and Apps which other mobile Operating Systems can’t offer. An Android based Samsung can be seamlessly switched to another Android phone without any significant loss of data or user experience.

Marketing lesson-3:
Be unique. Give something that others can’t copy easily. Don’t become easily replaceable.

Business management lessons from AAP’s failure

The sudden rise and equally sudden fall of Aam Aadmi Party has some important learning lessons for businesses which are currently in the growth mode.

Many businesses which start with a rapid growth in the beginning, start faltering after growing to a specific size. Maintaining growth momentum after attaining some size becomes a real challenge which few companies can overcome. Others either stagnate at that level or go back downhill.

AAP faced some management challenges which it could not overcome. Growing companies also face similar challenges. The debacle of AAP in 2014 elections has some management lessons for growing businesses.

Arvind Kejriwal’s
AAP rose to popularity really too fast. It promised a hope of a corruption free India. It is a success story of a brand getting hugely popular too fast. But, the brand AAP did not live up to the hype it generated. Why? Here are some reasons.

Management Bandwidth
One reason for AAP’s failure is the lack of Management Bandwidth. Just like many suddenly grown companies, AAP, too , faced lack of quality, talented and experienced manpower who could manage the party’s affairs and could provide leadership at various levels of the organization.

Only Branding Focus,
No marketing
AAP and Arvind Kejriwal are good at grabbing media attention and thereby keeping their brand afresh in popular mind. Somehow or the other AAP and its leader kept themselves in the news. Huge advertising budget and a lot of noise in the media may ensure brand awareness and visibility, it may not necessarily ensure marketplace success of the product. The product has to deliver on the brand promise. Here is where AAP failed. Media hype was good, but the party failed to deliver what it was expected to. Particularly, after the Delhi government fiasco, it became clear that AAP was good at agitations and not in execution. Along with focusing on popular attention, AAP should also have developed its own governance and administration arms.

Lack Of Structure
In any family managed business, there is no structure and the family members monopolize control over all decisions and resources. AAP functioned just like such a  business where all decision making rested with a select group of people. This lack of democracy disillusioned many big names in the party who deserted it recently.

Even though it is not the end of the road for AAP and it can definitely recover from the recent setback, it will have to make greater efforts to bounce back due to its own mistakes.

The business which wishes to cash in on its initial success must learn from these mistakes and avoid them.

लीडर को कितना काम करना चाहिए? नरेन्द्र मोदी से बिझनेस लीडरशीप के पाठ |

नरेन्द्र मोदी ने अपनी व्यक्तिगत ताकत के बलबुते पर अपने साम्राज्य का सर्जन किया है |

उनकी राजनैतिक कुनेह, उनका vision, उनकी संभाषण कला यह सब तो प्रशंसनीय हैं ही, लेकिन बिझनेस लीडर के point of view से उनका हार्ड वर्क, उनका कमीटमेन्ट और उनकी कार्यक्षमता तारिफ के काबिल है |

पिछले चार-पांच महिनों में उन्होंने कड़ी से कड़ी मेहनत की है | सेंकडों रैलियॉं, सभाएं, इन्टरव्यूझ तथा अन्य प्रचार प्रवृत्तिओं में हिस्सा लिया है | रोज चार घंटों से ज्यादा नींद नहीं पाई है | लाखों किलोमीटर्स का प्रवास किया है |

इस चुनाव में उनके जितनी मेहनत शायद बीजेपी के किसी नेता या कार्यकर ने भी नहीं की है |

बिझनेस लीडर भी अपनी कंपनी में सब से ज्यादा काम करनेवाला होना चाहिए | मैं अपने बिझनेस सेमिनारों में हमेशा कहता हुं कि अगर हमारे बिझनेस का कोइ एक कर्मचारी भी १२ घंटे काम करता है, तो हमारे खुद के ड्युटी अवर्स १२ से कम नहीं ही होने चाहिए | ड्युटी पर होना मतलब हम अपनी ओफिस में ही बैठे रहें यह जरुरी नहीं है | ओफिस या बाहर कहीं भी हो, लेकिन काम के सिलसिले में ही हम व्यस्त हों यह जरुरी है |

बहोत सारे बिझनेस गुरु अपने लेक्चर्स में कहते हैं कि “हमें हार्ड वर्क नहीं, स्मार्ट वर्क करना चाहिए | टेन्शन लेना नहीं, टेन्शन देना चाहिए |”

यह सब किताबी बकवास है |

सोचो नरेन्द्र मोदी ने खुद इतना काम नहीं किया होता केवल “स्मार्ट वर्क” पर, “टेन्शन देने” पर ध्यान केन्द्रित किया होता, तो उन्हें इतनी सफलता मिल पाती? रीमोट कन्ट्रोल से वारिस में मिली जागीर उडाई जा सकती है, नई जागीर खडी नहीं की जा सकती |

लीडर के कमीटमेन्ट से ज्यादा टीम के  कमीटमेन्ट की आशा रखना अर्थहीन है | अगर लीडर भागेगा, लीडर दिन-रात मेहनत करेगा तो ही टीम को काम करने का उत्साह, प्रेरणा और ताकत मिलेंगे |

नरेन्द्र मोदी ने यह कर के दिखाया है |
अपनी टीम को मोटीवेट करने के हेतु, बिझनेस लीडर के लिए कठोर परिश्रम का कोइ विकल्प नहीं है |

राजनाथ सिंघ जी से बिझनेस लीडरशीप का पाठ

नरेन्द्र मोदी ने अपने व्यक्तिगत charishma दिखाकर बीजेपी को कल ऐतिहासिक बहुमत दिलाया है |
मोदी जी को नापसंद करनेवाले ऐसा कह सकते हैं कि यह तो पूरी बीजेपी के प्रयत्नों का नतीजा है, या यह anti-congress  wave है जिसका फायदा बीजेपी को मिला है…

जो कुछ भी हो, लेकिन एक बात तय है कि अगर बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्रीपद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया होता, तो बीजेपी को इतनी भारी सफलता किसी हाल में हांसल नहीं होती | इस भारी मात्रा में बीजेपी की सफलता का पूरा श्रेय मात्र दो व्यक्तियों को जाता है | एक तो नरेन्द्र मोदी खुद और दूसरे बीजेपी के अघ्यक्ष राजनाथ सिंघ |

इस पूरी यशगाथा में राजनाथ सिंघ ने एक बुझु्र्ग, परिपक्व और दूरदर्शी नेता की भूमिका बखूब निभाई है |

जिस तरह उन्होंने नरेन्द्र मोदी की काबिलियत को पहचानकर, उन पर पूरा भरोसा रखकर, बहुत सारे दिग्गजों के खिलाफ जाकर भी नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदारी सौंपकर भारत को एक नरेन्द्र मोदी नाम की नइ आशा दिलाइ है, उस पूरे उदाहरण से हम अपने बिझनेस के लिए एक अच्छा पाठ सिख सकते है |

किसी भी विकासशील बिझनेस में दो प्रकार के employees होते है | एक ऐसे जो बहुत पुराने होते हैं, जो बिझनेसमेन के साथ शुरुआत से जुडे होते हैं | उनकी योग्यता वफादारी तथा बिझनेस जैसे है वैसे चलाये रखने की क्षमता तक सीमीत होती है | यह लोग बिझनेस को एक लेवल से आगे ले जाने के लिए असमर्थ होते हैं, फिर भी उन्हें ऐसा लगता है कि वो ही बिझनेस के सूत्रघार हैं और वह खुद नहीं होंगे तो बिझनेस बिखर जाएगा | वास्तव में यह लोग ही बिझनेस की विकासयात्रा में एक बाधा होते हैं | वह खुद तो कुछ ज्यादा कर नहीं सकते और किसी नये व्यक्ति को आ कर कुछ परिवर्तन लाने की अनुमती भी नहीं दे सकते |

दूसरे कुछ ऐसे काबिल नये employees होते हैं जिन में बिझनेस को आगे ले जाने की भरपूर काबिलियत रहती है | उन में बिझनेस की नइ चुनौतियों का सामना करके उसे विकास की नइ ऊंचाईयों तक पहुंचाने की क्षमता होती है |

बीजेपी में भी ऐसे पुराने लोग हैं जिन की क्षमता पार्टी को एक लेवल से ज्यादा ले जाने की बिलकुल नहीं है | अगर ऐसे ऐतिहासिक दिग्गजों को बागडोर सौंपते तो बीजेपी को इतनी सफलता कभी नहीं मिल पाती |

राजनाथ सिंघ को सही व्यक्ति की, उस की काबिलियत की पहचान है, और ऐसी व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपकर, पुराने दिग्गजों को समझा-पटाकर, उन्हें अपने स्थान पर रखकर नये सेनापति को पूरी स्वतंत्रता देकर, उस के पीछे चट्टान की तरह खडा रहकर, उस का हौंसला बढ़ाकर उन्होंने भारत के इतिहास को एक नया मोड दिया है |

बिझनेसमेन को भी अपनी कंपनी में स्थापित स्पीड-ब्रेकर्स को अपनी जगह पर रखकर, नये काबिल ड्राइवर को चुनकर उसे कंपनी की यात्रा आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता देनी चाहिए | स्पीड-ब्रेकर नडेंगे, रुठेंगे, नखरे करेंगे | लेकिन चिंता मत करो, क्यों कि यह स्पीड-ब्रेकर कहीं जा नहीं सकते | आज के समय में कोइ दूसरी कंपनी इस पुराने स्पीड-ब्रेकर को नहीं रखेगी | सही ड्राइवर ही आप को आगे जाने में मदद कर सकता है | उसे पेट्रोल दो, उस पर ब्रेक मत मारो |

सही ड्राइवर अपनी काबिलियत से किसी भी पार्टी, देश या कंपनी को नइ राह, नइ आश दिखा सकता है | राजनाथ सिंघ के “नरेन्द्रभाइ” ने यह साबित कर दिया है | हमें अपने बिझनेस के लिए उन से लीडरशीप का यही पाठ सिखने जैसा है |