Career में महिला और पुरुष समान क्यों नहीं हैं ?

Career में आगे बढना पुरुषों के मुकाबले  महिलाओंके लिए ज्यादा कठिन है | व्यवसाय-नौकरी करनेवाली career महिलाओं का जीवन आसान नहीं है |

PepsiCo कंपनी के सर्वोच्च स्थान पर बिराजमान भारतीय NRI महिला इन्द्रा नूयी ने अपनी ज़िंदगी का एक उदाहरण दे कर इस बात को पेश करने की कोशिश की है की अपनी Career में आगे बढने के लिए महिलाओंको ओफिस में तो पुरुषों के जितनी महेनत करनी ही पडती है, लेकिन साथ साथ उन्हें घर-परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी पडतीं हैं, जो पुरुषों को नहीं करना पडता | दोनों क्षेत्रों को न्याय देने में कहीं न कहीं तो कमी रह ही जाती है | इस वजह से महिलाओं को हमेशा अपने आप के साथ कुछ न कुछ समझौता-समाधान करना ही पडता है |

इन्द्रा नूयी के साथ उनकी माता, उनके पति राज नूयी तथा उनकी दो बेटियां उनके अमरिका के घर में रहतीं हैं | हर रोज रात १२ बजे ओफिस से घर पहुंचनेवाली इन्द्रा नूयी को जिस दिन PepsiCo की President चुना गया उस दिन वह दो घंटे जल्दी रात १० बजे घर पहुंची | अपनी मां को यह खुशखबर वह खुद देना चाहतीं थीं |

घर पहुंचते ही इन्द्राजी ने अपनी मां से कहा “मां, आज मैं आप के लिए एक बडी खुशखबर लाई हुं |”

मां : “तुम्हारी खुशखबर बाद में | पहले तुम दुकान पर जा कर दूध ले आओ |”

इन्द्रा : “मैं ने गैरेज में राज की गाडी देखी | वह कब आये है? आप उन्हें भी तो दूध लाने के लिए कह सकतीं थीं |”

मां : “राज ८ बजे आये हैं, लेकिन वह थक गये हैं | कल सुबह के लिए घर में दूध नहीं है, इस लिए तुम ही जा कर पहले दूध ले आओ |”

आखिर इन्द्रा पास वाले स्टोर पर जा कर दूध ले कर आईं और अपनी मां को मजाक में कहा “क्या मां, आप की बेटी को दुनिया की इतनी बडी कंपनी का President चुना गया है, और आप उस को दूध लेने को भेजतीं हैं?”

तब उनकी मां ने इन्द्रा नूयी को जो कहा वह अपनी Career में व्यस्त हर महिला की कठिन वास्तविकता का प्रतिघोष है | इन्द्रा नूयी की मां ने कहा, “हां, माना की तुम बडी कंपनी की प्रेसिडेन्ट हो, लेकिन उस के साथ साथ तुम एक मां, एक पत्नी, एक पुत्री और एक बहु भी हो | तुम्हारी कंपनी की प्रेसिडेन्ट की भूमिका तो और कोई भी निभा सकता है, परंतु तुम्हारी घर की यह भूमिकाएं और कोई नहीं निभा सकता | इस लिए हर रोज जब घर पहुंचो तब PepsiCo कंपनी की प्रेसिडेन्ट का ताज गैरेज में ही छोड कर आना, और अपने घर की जिम्मेदारियों की भूमिकाएं निभाना |”

दुनियाभर में करोडों इन्द्राएं इसी तरह अपनी Career और अपने घर-परिवार की जिन्मेदारियों को संतुलित करने के लिए झुझतीं रहतीं हैं |

खाना पकाना, कपडे-बरतन-साफ सफाई, घर का सामान खरिदना, बच्चे पैदा करना, उनका पालन-पोषण, उनकी  पढ़ाई, सांस-ससुर की देखभाल, ससुराल और परिवार के अन्य सभ्यों के साथ तालमेल बनाये रखना यह सारी जिम्मेदारियों का महत्तम बोज घर की महिला के सिर पर ही होता है | अपने नौकरी-व्यवसाय में व्यस्त महिलाओं के लिए भी इस में से राहत नहीं है, फिर चाहे वह PepsiCo की प्रेसिडेन्ट इन्द्रा नूयी भी क्यों न हो?

हम नारी शक्ति को सन्मान देने की बातें करते हैं | भ्रूण-हत्या रोकने की, बेटियां बचाने की मोहीम चलाते हैं | यह बहोत अच्छी बातें हैं | लेकिन अगर इस के साथ साथ हमारे घर, परिवार, समाज में जो ऐसी महिलाएं हैं जो अपना Career और घर-परिवार की दुगनी जिम्मेदारियां निभा रहीं हैं, उन्हें समझने की कोशिश करेंगे, उनके प्रयत्नों की कदर करेंगे, हो सके तो उनकी सहायता कर के कुछ जिम्मेदारियां कम करेंगे, और कुछ न हो सके तो कम से कम उनकी जिम्मेदारियों का बोज नहीं बढाएंगे, तो वह नारी शक्ति के सन्मान से कम नहीं होगा |

क्यों कि Career के मामले में पुरुषों का पलडा भारी है | उन्हें Career में सफल होने के लिए महिलाओं की तुलना में कम बोज उठाने पडते हैं | स्त्री-पुरुष की असमानता का संबंध इस बोज से भी है | अगर हमें समानता लानी हो, तो यह बोज समान करना होगा |