मार्केट में मंदी क्यों और किसे लग रही है?

मंदी की असर सब को नहीं है, कुछ इन्डस्ट्रीझ अच्छा ग्रोथ कर रहीं हैं, और कुछ और मंदी का अनुभव कर रहीं हैं | मंदी के दो मुख्य कारण हैं…

१. ब्लेक मनी इकोनोमी पर ब्रेक
भारत की इकोनोमी का बडा हिस्सा दो नंबर की cash economy पर चलता है | इकोनोमी में ब्लेक मनी की एन्ट्री के दो बडे निम्न लिखित स्त्रोत हैं |

एक तो अलग अलग टाइप की ऱिश्वतों, घुस, bribe के रास्ते से unaccounted पैसा economy में घुसता है | इस में भी सब से बडा स्त्रोत था defence, रक्षा विभाग के कोन्ट्रेक्ट्स | पीछले एक साल से इस पर बहोत बडी ब्रेक लगी है | 
ब्लेक मनी का दूसरा बडा स्त्रोत है रीयल एस्टेट मार्केट | 
रीयल एस्टेट की खरीदी के समय unaccounted gold या दूसरा ऐसा ही पैसा इकोनोमी में फिर से प्रवेश करता है | इस इन्डस्ट्री में over supply और बेफाम दाम-वृद्धि की वजह से वास्तविक मंदी है | रीयल एस्टेट के सौदों की संख्या कम हो गइ है, जीस का बडा असर दो नंबरी इकोनोमी पर हुआ है | यह एक बडी वजह है, मंदी के माहोल की |
मार्केट में पैसा कम लग रहा है इस की वजह यही है | Liquidity कम होने के कारण मंदी स्वाभाविक है, और १००% official काम करनेवालोंको भी उस का असर होता ही है | 
२. E-commerce तथा m-commerce का प्रभाव
मोडर्न रीटेल (मॉल, सुपर मार्केट, चेन स्टोर्स इत्यादि) के साथ साथ e-commerce का प्रभाव बढ़ रहा है | इस का भारी असर छोटे व्यापारियों को हो रहा है | आज से ५-७ साल पहले यह e-commerce कंपनियों का प्रभाव शून्यवत था, लेकिन अब इनका पावर बढ़ा है | दिवाली-२०१५ में Amazon, Flipkart, Snapdeal etc. लगभग १२-१५ हजार करोड रुपयों का टर्नओवर किया | याद रहे, यह सारा टर्नओवर ट्रेडीशनल रीटेलर्स की जेब में से ही कम हुआ है | जो मेन्युफेक्चरर, होलसेलर, रिटेलर इस e-commerce प्लेटफोर्म का हिस्सा हैं, उन को मंदी का अनुभव नहीं हो रहा है | बाकी लोगों को उस का प्रभाव महसूस हो रहा है | e-commerce के साथ mobile app based m-commerce भी अनेक नई सुविधाएँ लेकर आ रहा है | यह सारी कंपनियों को अलग अलग foreign कंपनियों से धूम पैसा इन्वेस्टमेण्ट के रुप में मिला है, इस लिए वह नुक़सान झेल कर भी ग्राहकों को लुभाकर ज़्यादा डीस्काउन्ट दे रहीं हैं | यह सारा नाटक कितना लंबा चलेगा यह तो नहीं कह सकते क्यों कि यह उन की नुक़सान सहकर धंधा चलाने की क्षमता पर निर्भर है | जब तक easy money मिलेगी तब तक तो यह नाटक चलता रहेगा |

E-commerce अपने आप में बहोत फूलेगा-फलेगा | लेकिन ऐसा लग रहा है कि इन में से बहोत सारी कंपनियाँ बंद हो जाएँगी या उन्हें कोइ दूसरी कंपनी ख़रीदकर ख़ुद में विलीन कर देगी | अंत में e-commerce के हर क्षेत्र में एक-दो नाम ही बचेंगे । ऐसा हो, यह bubble फूटे तब तक थोड़ा शोर होगा ।

इस का यह सबक हैं |

e-commerce/m-commerce revolution का हिस्सा बनकर उस की तेजी का लाभ उठायें | ऐसा न हो सके तो कस्टमर को वही सुविधा, चोइस, संतोष और value addition देने का प्रबंध करें जो e-commerce दे रहा है |

Author: Sanjay Shah

Sanjay is the author of "Business Management Simplified" which provides Practical, Actionable Solutions for Entrepreneurs. It is an all-in-one guidebook to start, run and grow a small and mid-size business to the next level. He is also an SME Business Coach, Seminar Leader and Motivational/Keynote speaker, Sanjay is based in Mumbai (India). He advises many businesses on Strategy, Leadership, Marketing, Branding, Customer Experience Management and Organization Development. He conducts various self-help seminars and workshops for companies and groups in English, Hindi and Gujarati. For more info, visit : www.SanjayShahSeminar.com

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