पान की दुकान से कस्टमर सर्विस के पाठ

किसी पान वाले की दुकान पर आप गये होंगे तो आप ने कुछ ऐसा अनुभव किया होगा |
१) उस के पास आनेवाले कस्टमरों को वह क्रम अनुसार ही attend करता है | पान या मावा बनाते वक्त कोइ सिगरेट-गुटखा वगैरह खरिदने को आता है तो उस को wait करना पडता है | अन्य जगहों पर उतावल से, जल्दी सर्विस की डीमान्ड करने वाला कस्टमर भी यहां मजबूरी से wait करता है | पानवाला अपने कस्टमर की सायकोलोजी अच्छी तरह से समझता है | जो अपनी तंबाकु-गुटखा-सिगरेट वगैरह की आदत से मजबूर होते हैं ऐसे weak-कमजोर लोग ही वहां आते हैं| ऐसे मजबूर लोगों के पास और कोइ विकल्प ही नहीं है, इस लिए वह वहां इन्तज़ार करेंगे, कहीं नहीं जायेंगे |
पान वाले के पास से कस्टमर सर्विस का पहला पाठ : अपने कस्टमर की सायकोलोजी को समझो | उस अभ्यास के अनुसार उस के साथ बर्ताव करो |

२) हर ग्राहक का एक “खानदानी” पानवाला होता है| उस को कैसा पान-मावा चाहिए यह पानवाला खास से याद रखता है| और कस्टमर को इस बात का अपूर्व गर्व होता है| इसी वजह से कस्टमर पानवाले को छोडता नहीं है|

पान वाले के पास से कस्टमर सर्विस का दूसरा पाठ : अपने कस्टमर की पसंद-नापसंद पर ध्यान दें | ग्राहक को आप का व्यक्तिगत ध्यान प्राप्त होगा तो वह आप का साथ कभी भी नहीं छोडेगा…

३) पानवाले के पास से कस्टमर को हमेशा वही क्वोलिटी मिलती है, हर एक चीज़ की सही मात्रा, प्रमाण सब कुछ वैसा ही हमेशा मिलता है, इसी लिए कस्टमर उस पानवाले को छोडता नहीं है|
पान वाले के पास से कस्टमर सर्विस का तीसरा पाठ : Be consistent. कस्टमर को हमेशा वही क्वोलिटी मिले वह खास ध्यान दें|

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