सिस्टम और प्रोसेस में तालमेल से ही कार्यक्षमता बढ़ सकती है |

हमारी सरकारी ओफिसों में करोडों रुपये खर्च कर के Information Technology की आधुनिक सिस्टम्स लगाइं जातीं हैं लेकिन फिर भी गलत प्रोसेसींग-गलत कार्यपद्धति की वजह से आम जनता के समय की कोइ बचत या तकलिफों में कमी होती नहीं है, उसका जीवंत उदाहरण है पासपोर्ट सेवा केन्द्र |

पासपोर्ट एप्लीकेशन के प्रोसेसींग का काम प्राइवेट कंपनी Tata Consultancy Services-TCS को दिया को दिया गया है |
अलबत्त TCS की सिस्टम की वजह से काउन्टर पर पहुंचने के बाद काम त्वरा से होता है, पासपोर्ट सेवा केन्द्र में TCS के कर्मचारियों का काम, बर्ताव, ट्रेनिंग प्रशंसनिय है | उसी पासपोर्ट केेन्द्र में अभी भी बाकी के कुछ कामों के लिए सरकारी कर्मचारी ही हैं, और TCS के काम करने के तरिके का रंग उनके उपर कथ्थई नहीं चढ़ा है | भारत में सरकारी कर्मचारियों के पास से TCS जैसे काम की उम्मीद भी नहीं रख सकते |

TCS की  वजह से काम सिस्टेमेटीक जरुर हुआ है, पर पूरी प्रक्रिया-प्रोसेसींग में कहीं तो बहोत बडा fault है | इसी वजह से पासपोर्ट केन्द्रों में जनसमुदाय के समय का अधिक व्यय होता है |

मुंबइ-मलाड स्थित पासपोर्ट सेवा केन्द्र में मैंने स्व-अनुभव किया है कि पासपोर्ट प्रक्रिया के लिए बनाये गये चार काउन्टरों पर टोटल १५-२० मिनिट का ही समय ही लगता है | पासपोर्ट सेवा केन्द्र में जाने के लिए पहले से appointment दी जाती है | लेकिन फिर भी एक व्यक्ति को चार काउन्टर पर काम पूरा करने में कम से कम 3 घंटों का समय केन्द्र में लगता ही है | क्यों कि सब को अलग-अलग ७ जगहों पर अपना नंबर आने का इन्तज़ार करना पडता है |

इस कारण हर व्यक्ति के करिब २.५ घंटे व्यय होते है | एक दिन में ३०० लोग एक केन्द्र में आते हैं | हर दिन ऐसा एक केन्द्र करिब १०० working days के व्यय का कारण बनता है |

क्यों?

क्यों कि पासपोर्ट संबंधी प्रक्रिया के बारे में सही तरिके से स्टडी नहीं हुआ है |

एक तो appointment के लिए समय देने का तरिका गलत है | १५ मिनिट के स्लोट में एक साथ १५-२० लोगों को एक समय पर बुलाया जाता है | हर अर्जदार को कुल मिला के अलग इलग चार काउन्टरों पर जाना पडता है |

इस का मतलब है कि केन्द्र की चारों प्रोसेस के काउन्टर्स १५ मिनिट में १५-२० लोगों को हेन्डल कर लेने चाहिए | पर सब से पहले काउन्टर पर ही ऐसा नहीं होता है | चार काउन्टर में से सब से पहले काउन्टर पर सब से ज्यादा समय लगता है | और चार में से यह पहले काउन्टरों पर ही मेनपावर सब से कम है | अंदर के २-३-४ (A-B-C) काउन्टरों पर अनेक गुना मेनपावर है | परंतु यहां तक पहुंचने के लिए screening करनेवाले पहले काउन्टर पर सब से ज्यादा समय लगता है, और उन पर ही मेनपावर कम है | यह बोटल-नेक का typical example है |

कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ाने के लिए सिस्टम और प्रोसेस-कार्यपद्धति का तालमेल सही होना चाहिए | TCS या इस प्रोसेस की Design  में शामिल एजन्सी अगर प्रोसेस के अमलीकरण में प्रेक्टीकल Bottleneck का अभ्यास कर के उन  में सुधार जब तक नहीं करेगी तब तक बडी बडी सिस्टम्स लगाने के बाद भी २० मिनिट के काम के लिए ३ घंटे पब्लिक को बिताने ही पडेंगे |

Author: Sanjay Shah

Sanjay is the author of "Business Management Simplified" which provides Practical, Actionable Solutions for Entrepreneurs. It is an all-in-one guidebook to start, run and grow a small and mid-size business to the next level. He is also an SME Business Coach, Seminar Leader and Motivational/Keynote speaker, Sanjay is based in Mumbai (India). He advises many businesses on Strategy, Leadership, Marketing, Branding, Customer Experience Management and Organization Development. He conducts various self-help seminars and workshops for companies and groups in English, Hindi and Gujarati. For more info, visit : www.SanjayShahSeminar.com

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