नरेन्द्र मोदी कैसे सफल हो सकेंगे?

हमने नरेन्द्र मोदी पर बडी आश तो लगाइ है, लेकिन क्या मोदी साहब के पास कोई जादुई छड़ी है की वह उसे घुमायेंगे और सब कुछ ठीक हो जायेगा?

अगर भारत को आगे बढ़ाना है, तो सवा सौ करोड जनता के इस देश के नागरिकों को भी कुछ करना पडेगा |

सरकारी नौकरों के एश-ओ-आराम तथा politicians के बेसुमार धन-दौलत-जाहोजलाली का उदाहरण देखकर हम में से कई लोगों को भी काम न कर के पैसा कमाने की लालच लगी है | भारत के कुछ लोगों की सोच भी सरकारी हो गई है | दूसरी ओर आजकल हार्डवर्क के बदले “स्मार्ट वर्क” का ट्रेन्ड चला है | सब जगह कम से कम महेनत कर के “येनकेन प्रकारेण” ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की रेस लगी है | यह खतरनाक आदत बदलनी होगी |

आठ घंटों के ओफिस समय में आधा घंटा देर से आना, फिर आधा घंटा चाय-पानी और इधर-उधर टाइम-पास करना | १ घंटे का लंच-टाइम लेना और बिच में दो-तीन टी-ब्रेक लेना | छूटने के समय से आधे घंटे पहले ही इस की तैयारी में लग जाना | बाकी के समय भी ओवरटाइम और छूट्टीयां कितनी मिलेंगी इस की फिक्र में लगे रहना | किसी भी ओफिस में ऐसे सरकारी attitude वाले, सदैव घडी और कैलन्डर  देखकर काम का नाटक करनेवाले character मिलेंगे | ऐसी मानसिकता प्रगति की नहीं, बल्की अधोगति की निशानी है |

कुछ बिझनेसमेनों में भी कस्टमर को cheat करके, उसे उल्लु बनाकर किसी भी तरह उसे अपनी चीज़ चीपकाके “मलाई” खा कर अपनी होशियारी साबित करने की होड लगी है | सरकार के टैक्स जमा नहीं करना, लांच-रिशवत दे कर के, गलत तरिकों से पैसा कमाना, काला धन जमा कर के देश के प्रति अपना रुण अदा नहीं करना यह भी सरकारी attitude से कम नहीं है |

किसी भी देश की प्रगति का आधार अधिकांश वह कितनी प्रोडक्ट या सर्विस उपलब्ध करा सकता है, उस के उपर है | अगर हमें आगे बढना है, तो कम से कम काम कर के ज्यादा से ज्यादा पैसा एंटने का कामचोरी का सरकारी attitude बदलना होगा | काम के प्रति हमारा रवैया बदलना होगा | हमारी आलस दूर करनी होगी | अपने समय का पालन करना होगा | हमारे जीवन में Discipline लाना होगा |

अगर हम ऐसा नहीं कर सकेंगे, तो नरेन्द्र मोदी साहब नाम की जादुई छडी भी कुछ नहीं कर सकेगी |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *