पानी की हो या दु:खों की, बारिश रुकती ही है |

मुंबइ में जब ज़ोरों की बारिश होती है, घंटों तक और कभी कभी कुछ दिनों तक जमकर बारिश होती है, तब ऐसा लगता है, कि यह बारिश रुकेगी ही नहीं |

लेकिन आखिर बारिश रुकती ही है | सूरज की रोशनी वापस आती ही है | दिन प्रकाश सभर हो जाता है | जीवन की चहल पहल फिर से शुरु हो जाती है | हम बारिश और उस से होनेवाली तकलिफें भूल जाते हैं |

जीवन में भी ऐसा ही होता है | जब दु:खों की, तकलिफों की बारिश होती है, जब समस्याएं हमें घेर लेतीं हैं, तब हमें लगता है, की अब इस का कोइ अंत नहीं होगा |

लेकिन उस वक्त यही याद रखना जरुरी है, की कोइ भी बारिश आखिर में रुकती ही है | चाहे वो पानी की हो या दु:खों की |

जीवन के आकाश में संभावनाओं का मेघधनुष्य हमारे जीवन को विभिन्न रंगों से भरने के लिए हमेशा मौजुद ही है |

हां मौसम बदलने में समय लगता है |
थोडा धैर्य रखें तो हर मौसम बदलता ही है |
चाहे कितना ही कठिन क्यों न हो…!

Author: Sanjay Shah

Sanjay is the author of "Business Management Simplified" which provides Practical, Actionable Solutions for Entrepreneurs. It is an all-in-one guidebook to start, run and grow a small and mid-size business to the next level. He is also an SME Business Coach, Seminar Leader and Motivational/Keynote speaker, Sanjay is based in Mumbai (India). He advises many businesses on Strategy, Leadership, Marketing, Branding, Customer Experience Management and Organization Development. He conducts various self-help seminars and workshops for companies and groups in English, Hindi and Gujarati. For more info, visit : www.SanjayShahSeminar.com

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