कर्मचारियों की कार्यक्षमता कैसे बढ़ाएं…?

किसी भी कंपनी में काम करनेवाले कर्मचारी अगर खुश होंगे, तो वह अच्छा काम कर पाएंगे |

लेकिन वह खुश क्यों नहीं रह सकते हैं?

काम और पर्सनल लाइफ के संतुलन के लिए समय का अभाव उन्हें परेशान करता है | हफ्ते में ६ दिन १०-१२ घंटों की ड्यूटी और ट्रावेलींग के समय के कारण ज्यादातर लोग अपने घर में एक Visitor ही होते हैं | लंबे समय तक अगर यह चलता रहता है, और बिच में कभी छूट्टी ही नहीं मिलती, तो उस का स्ट्रेस लेवल बढता रहता है |

इस की एक साइड इफेक्ट यह होती है कि ड्यूटी के समय पर लोग टैन्शन कम करने के लिए टाइम पास करने में या अपने पर्सनल काम में जुडे रहते हैं | उनकी कार्यक्षमता घटती है | किसी भी ओफिस में २० से ४० प्रतिशत समय व्यय ही होता है |

इसी लिए हर कर्मचारी को एक साल में कुछ छूट्टीयां मिलनी ही चाहिएं ऐसे कानून बनाए गये हैं | कर्मचारियों के भले के लिए, उनके सर्वांगी विकास के लिए यह जरुरी है |

कंपनी के बोस या पार्टनर-डिरेक्टर अपनी मरझी के अनुसार आते-जाते हैं, अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक कार्यों के लिए बाहर जाते हैं, या छूट्टीयां भी लेते हैं | यही स्वतंत्रता कर्मचारियों को नहीं होती |

यह हकिकत है की सभी को ऐसी स्वतंत्रता दी जाए तो उससे नुकसान होने के चान्सीस हैं, क्यों की कुछ कर्मचारी उस का गलत फायदा भी उठा सकते हैं | यह वैसे कर्मचारी होते हैं जो घडी या केलेन्डर देखकर सिर्फ हाजरी भरने के लिए ओफिस में आते हैं | उन के लिए ड्यूटी भरना काम करने से ज्यादा महत्त्व रखता है |

लेकिन साथ साथ यह भी याद रखना जरुरी है कि कर्मचारी भी इन्सान हैं, उन की भी ज़िंदगी है, वह मशिन नहीं हैं | जो अच्छे कर्मचारी हैं, जो हाजरी भरने के मुकाबले काम करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं, उन की ड्यूटी और पर्सनल लाइफ का बेलेन्स बिगड न जाए इस लिए उन्हें जरुरत के समय पर कुछ छूटछाट दी जाए तो वह खुश होंगे और अपना काम अौर भी अच्छी तरह से और दिल से कर पाएंगे, उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी |

छूट्टीयां या समय पालन के मामले में मालिकों और कर्मचारियों के बिच बहुत ज्यादा भेदभाव होगा, तो उन्हें लगेगा की तुम्हारा खून खून, और हमारा खून पानी?

यह कंपनी के लिए नुकसानकारक होगा | ऐसे भेदभाव मिटने चाहिए…| सिर्फ ड्यूटी के घंटों पर नहीं, परंतु कार्यक्षमता पर भी ध्यान देना चाहिए |

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