ब्रान्ड पर से कस्टमर का भरोसा कब उठ जाता है?

जब कोई ब्रान्ड अपने Logo या Tagline के विरुद्ध काम करती है, तो कस्टमर का भरोसा उस पर से उठ जाता है |

ब्रान्ड जो प्रोमिस करती है, वहीं करनी चाहिए, और वही सच्चाई Logo या Tagline या किसी भी प्रकार के मेसेज में अभिव्यक्त होनी चाहिए |

अपने पेकेजिंग पर “बेस्ट क्वालिटी” लिख देने से अंदर की प्रोडक्ट बेस्ट नहीं बन जाती | और अगर वह प्रोडक्ट निम्नस्तर की होगी, तो कोइ कस्टमर उस “बेस्ट क्वालिटी” वाली बात पर भरोसा नहीं करेगा |

कुछ ऐसा ही मुंबइ म्युनिसिपल कोर्पोरेशन के सफाई विभाग का है | मुंबइ में आपने देखा होगा की सफाई की ट्रक, सडकों पर रखे गार्बेज-बीन या सफाई कर्मचारियों के युनिफोर्म पर लिखा है  “Clean-up चकाचक मुंबइ” | लेकिन मुंबइ शहर की सफाइ का निम्न स्तर देखकर तुरंत पता चल जाता है कि इस “चकाचक मुंबइ” स्लोगन का कोइ मतलब नहीं है | शहर तो छोडो वह ट्रक, वह गार्बेज बीन या वह युनिफोर्म में से भी कुछ साफ सुथरा या चकाचक नहीं है | “चकाचक मुंबइ” सिर्फ लिखनेवाले की कल्पना से आगे कहीं भी नहीं है |

ब्रान्ड का स्लोगन या टेग-लाइन बिना सोचे समझे लिख डालेंगे, ब्रान्ड उस के अनुसार काम नहीं करेगी, तो ब्रान्ड की कथनी और करनी में अंतर रह जाएगा | ब्रान्ड की प्रोमिस और पर्फोर्मन्स सुसंगत नहीं होंगे, तो ब्रान्ड पर कोइ भरोसा नहीं करेगा | गलत स्लोगन से ब्रान्ड को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है |

2 thoughts on “ब्रान्ड पर से कस्टमर का भरोसा कब उठ जाता है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *